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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस – 2020


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2020

EVENT DETAILS AND ORGANIZER:

  • Date:2019-03-10
  • Location:Santoshi Nagrar, Raipur
  • Organized by:Aeawa Group
  • Address:A-51 Bajaj Colony Near Gurukul School Raipur

आशीर्वाद एजुकेशन एंड वेलफेयर एसोसिएशन में हर साल के तरह मुखतः सभी नेशनल डेज को Celebrate जाता रहा है, एस बार भी एस मौके में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर में श्रीमति नीता डूमरे जी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई, साथ ही उन्होंने ने एस दिन की विशेषता’ को सबके साथ साझा भी किया I

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को अधिकारिक तौर पर पहली बार 1911 में पहचान मिली। इसके बाद 1975 में अंतरराष्ट्रीय महिला वर्ष के दौरान, यूनाइटेड नेशन्स ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को सिलेब्रेट करना शुरू किया और तभी से हर साल इसे इस तारीक पर मनाया जाता है।
1910 में ही द सोशलिस्ट इंटरनेशनलस ने कोपेनहेगन में हुई एक मीटिंग में महिला दिवस की स्थापना की। इस दिवस की स्थापना खास तौर पर महिला अधिकारों और उन्हें दुनियाभर में मताधिकार दिलाने वाले आंदोलनों का सम्मान करने के लिए की गई। कोपेनहेगन मीटिंग के बाद पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को अधिकारिक तौर पर 1911 में पहचान मिली। ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में 10 लाख से ज्यादा महिला और पुरुषों ने रैलियों में हिस्सा लिया। मताधिकार की मांग के साथ ही सरकारी नौकरी, काम करने का अधिकार और वोकेशनल ट्रेनिंग जैसी मांग भी उठाई गईं ताकि काम की जगह पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म किया जा सके।

1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, रूस में महिलाओं ने ‘रोटी और शांति’ (Bread and Peace) की मांग में धरना-प्रदर्शन किए। प्रदर्शन फरवरी महीने के आखिरी रविवार को किया गया जो जॉर्जियन कैलेंडर के हिसाब से 8 मार्च की तारीक बना। प्रदर्शन के 4 दिन बाद महिलाओं को वोट करने का अधिकार मिला। 1975 में अंतरराष्ट्रीय महिला वर्ष के दौरान यूनाइटेड नेशन्स ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को सिलेब्रेट करना शुरू किया। इस दिन का असली सार यही है कि महिलाओं को उनकी शक्ति और उनको अपने अधिकारों की सही पहचान हो।

महिलाओं में कानून के प्रति सजगता की कमी उनके सशक्तीकरण के मार्ग में रोड़े अटकाने का काम करती है। अशिक्षित महिलाओं को तो भूल जाइए, शिक्षित महिलाएं भी कानूनी दांवपेच से अनजान होने की वजह से जाने-अनजाने में हिंसा सहती रहती हैं। ऐसे में महिलाओं को कानूनी रूप से शिक्षित करने के लिए मुहिम शुरू करना वक्त की जरूरत बन गया है।